आज #उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी)के #स्थापना दिवस पर विशेष !
साथियों 24-25 जुलाई 1979 वह #स्वर्णिम क्षण था जब देवभूमि के सच्चे सपूतों ने अलग पहाड़ी राज्य की मांग को संगठित रूप देने के लिए #उत्तराखंड क्रांति दल की नींव रखी।
#मसूरी में डॉ. डी.डी.पंत,इंद्रमणि बडोनी,बिपिन चंद्र त्रिपाठी,काशी सिंह ऐरी और अन्य दूरदर्शी नेताओं के नेतृत्व में यूकेडी का जन्म हुआ,जो मात्र एक राजनीतिक दल नहीं बल्कि पहाड़ की अस्मिता और अधिकारों की लड़ाई का प्रतीक बना।
उस समय #उत्तर प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में विकास की उपेक्षा,सांस्कृतिक अलगाव और प्रशासनिक दूरदर्शिता की कमी चरम पर थी।यूकेडी ने इस अन्याय के खिलाफ सशक्त #क्रांति का बिगुल बजाया।भूख हड़तालें, जन-जागरण रैलियां,आंदोलन और बलिदान ने हर कदम पर दल ने पहाड़ी जनता की आवाज को मजबूती दी।
#यूकेडी के निरंतर संघर्ष ने ही अंततः 15 अगस्त 1996 को लाल किले से #प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा को अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण में #उत्तराखंड (तत्कालीन नाम उत्तरांचल) राज्य बनाने की औपचारिक #घोषणा करनी पडी। यह लंबे समय से चल रहे पहाड़ी अलग राज्य आंदोलन (विशेष रूप से उत्तराखंड क्रांति दल और जनता के संघर्ष) का महत्वपूर्ण परिणाम था।
घोषणा के उपरान्त भी एक नये संघर्ष बाद केन्द्र की एनडीए सरकार को विवश किया और 9 नवंबर 2000 को #उत्तर प्रदेश #पुनर्गठन #अधिनियम 2000 के तहत उत्तराखंड आधिकारिक रूप से भारत का 27वां राज्य बना।लाखो लोगो का देखा सपना साकार हुआ।
आज #यूकेडी के स्थापना दिवस पर हम उन सभी क्रांतिकारियों,शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं जिन्होंने अपनी सुख और सुविधाएं त्यागकर पहाड़ की पीड़ा को राष्ट्र की चेतना में जगह दिलाई।
#यूकेडी की विचारधारा आज भी प्रासंगिक है #पहाड़ की आवाज, #पहाड़ के लोग,#पहाड़ का विकास।
आज का दिन हमें याद दिलाता है कि राज्य बनने मात्र से संघर्ष समाप्त नहीं हो गया। #पर्यावरण संरक्षण,#युवाओ का पलायन रोकना,स्थानीय #रोजगार, सांस्कृतिक #संरक्षण और सच्चे #स्वायत्तता के लक्ष्य अभी भी पूरे होने बाकी हैं जिस के लिए यूकेडी नगण्य संसाधनो के साथ आज भी संघर्ष कर रही है।
जय #भारत,जय #उत्तराखंड
साथियों आइऐ #यूकेडी के आदर्शों को अपनाकर देवभूमि को मजबूत,समृद्ध और खुशहाल बनाने का संकल्प लें।
# #उत्तराखंड #kashisinghairy